नई दिल्ली। देश में वाहन फिटनेस व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। Government of India के Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) ने 24 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत कुछ विशेष श्रेणी के वाहनों की फिटनेस जांच के लिए RTO कार्यालयों को पुनः अधिकार दे दिए हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी पत्र संख्या RT-23013/11/2025-T के अनुसार अब Category A और Category C के वाहनों की फिटनेस जांच और प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य RTO के माध्यम से किया जाएगा, भले ही उस क्षेत्र में Automated Testing Station (ATS) संचालित हो।
ATS में तकनीकी दिक्कत बनी वजह
MoRTH ने स्पष्ट किया है कि इन श्रेणियों के वाहनों की फिटनेस जांच के दौरान ATS में तकनीकी त्रुटियां सामने आ रही थीं। साथ ही AIS-128 मानक में Category A और Category C वाहनों के परीक्षण की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं है, जिससे मशीन आधारित जांच संभव नहीं हो पा रही थी। इसी कारण RTO को दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पहले क्यों हुआ था RTO से फिटनेस पर रोक
देशभर में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए पहले यह निर्णय लिया गया था कि सभी वाहनों की फिटनेस जांच केवल Automated Testing Station के माध्यम से होगी। इसका उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और मशीनों के जरिए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना था। इसी क्रम में RTO द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस व्यवस्था को जनहित और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से न्यायालयों ने भी उचित माना था।
सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता
नए आदेश के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि—
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10 वर्ष से अधिक पुराने डीज़ल वाहन
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15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल निजी वाहन
अपनी तकनीकी आयु लगभग पूरी कर चुके होते हैं। ऐसे वाहनों की फिटनेस यदि मशीन आधारित जांच के बिना दी जाती है, तो यह सड़क सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। वहीं निर्माण कार्यों में लगातार भारी दबाव में चलने वाले वाहनों की फिटनेस भी बिना मशीनरी जांच के होना दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा सकता है।
विभाग और ATS संचालकों की राय
ATS केंद्र संचालकों का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह सरकार का है और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। वहीं विभिन्न राज्य परिवहन विभागों का कहना है कि यह आदेश केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार लागू किया जा रहा है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का यह फैसला जहां व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है, वहीं सड़क सुरक्षा के मूल उद्देश्य से इसके संभावित प्रभावों पर भी गंभीर मंथन जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस व्यवस्था के साथ सुरक्षा मानकों को कैसे संतुलित करती है।



